चरणामृत सेवन करने से पुनर्जन्म नहीं होता
Astrology Articles I Posted on 03-07-2018 ,16:45:01 I by: vijay
अक्सर मंदिरों में आपको पुजारी ने चरणामृत या पंचामृत दिया होगा। आप जानते हैं इन दोनों में फर्क क्या है?
अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।
विष्णो पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते।।
अर्थात भगवान विष्णु
के चरणों का अमृतरूपी जल सभी तरह के पापों का नाश करने वाला है। यह औषधि के
समान है। जो चरणामृत का सेवन करता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता है।
ऐसे बनता चरणामृत : तांबे
के बर्तन में चरणामृतरूपी जल रखने से उसमें तांबे के औषधीय गुण आ जाते
हैं। चरणामृत में तुलसी पत्ता, तिल और दूसरे औषधीय तत्व मिले होते हैं।
मंदिर या घर में हमेशा तांबे के लोटे में तुलसी मिला जल रखा ही रहता है।
चरणामृत लेने के बाद सिर पर हाथ ना फेरें
चरणामृत
ग्रहण करने के बाद बहुत से लोग सिर पर हाथ फेरते हैं, लेकिन शास्त्रीय मत
है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है। चरणामृत हमेशा
दाएं हाथ से लेना चाहिए और श्रद्घाभक्तिपूर्वक मन को शांत रखकर ग्रहण करना
चाहिए। इससे चरणामृत अधिक लाभप्रद होता है।
शुभता का प्रतीक है पंचामृतपंचामृत
का अर्थ है ‘पांच अमृत’। दूध, दही, घी, शहद, शकर को मिलाकर पंचामृत बनाया
जाता है। इसी से भगवान का अभिषेक किया जाता है। पांचों प्रकार के मिश्रण से
बनने वाला पंचामृत कई रोगों में लाभदायक और मन को शांति प्रदान करने वाला
होता है। इसका एक आध्यात्मिक पहलू भी है। वह यह कि पंचामृत आत्मोन्नति के 5
प्रतीक हैं। जैसे- दूध- दूध पंचामृत का प्रथम भाग है। यह शुभ्रता का प्रतीक है अर्थात हमारा जीवन दूध की तरह निष्कलंक होना चाहिए।
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